एक बंदूकधारी ने सुरक्षा घेरा तोड़कर वाशिंगटन डीसी में आयोजित व्हाइट हाउस कॉरेस्पोंडेंट्स एसोसिएशन के सालाना रात्रिभोज जलसे में गोलियां चलाईं। उस रात्रिभोज में संयुक्त राज्य अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प और प्रशासन के अन्य वरिष्ठ अधिकारी शामिल थे। लेकिन सभी बाल-बाल बच गए। गोली चलाने वाले संदिग्ध व्यक्ति को गिरफ्तार कर लिया गया है। उसकी पहचान कैलिफोर्निया के टोरेंस निवासी कोल टॉमस एलन (31) के रूप में हुई है। यह हिंसा की तीसरी घटना है जिसमें स्पष्ट रूप से ट्रम्प को निशाना बनाया गया है। इससे पहले एक घटना में एक चुनावी रैली के दौरान एक हमलावर की गोली राष्ट्रपति के कान को छूकर निकल गई थी और दूसरी घटना में एक गोल्फ कोर्स के पास एक बंदूकधारी को पकड़ा गया था, जहां ट्रम्प का अक्सर आना-जाना होता था। व्हाइट हाउस के मुताबिक, इस मामले में संदिग्ध व्यक्ति ने “स्पष्ट रूप से कहा” कि वह प्रशासन के अधिकारियों को निशाना बनाना चाहता था और कानून प्रवर्तन अधिकारियों द्वारा साझा किए गए संदिग्ध व्यक्ति के एक नोट में भी, उसने कहा कि वह अब किसी “गद्दार को अपने अपराधों से उसे रंगने” की इजाजत नहीं दे सकता। यह घटना हाल के सालों में राजनीतिक हस्तियों पर हुए कई सुर्खियां बटोरने वाले हमलों के बाद सामने आई है। इन हमलों में सितंबर 2025 में यूटा में चार्ली किर्क की हत्या, कुछ महीने पहले मिनेसोटा की डेमोक्रेटिक स्टेट रिप्रेजेंटेटिव मेलिसा हॉर्टमैन एवं उनके पति की हत्या और 2022 में पूर्व डेमोक्रेटिक हाउस स्पीकर नैन्सी पेलोसी के पति पॉल पेलोसी पर हमला शामिल है। यह घटना ट्रम्प के दूसरे कार्यकाल, जो आव्रजन सहित प्रमुख नीतियों पर बढ़ते ध्रुवीकरण और बदनाम फाइनेंसर एवं दोषी यौन अपराधी जेफरी एपस्टीन के साथ उनके रिश्तों से सराबोर है, के एक साल से ज्यादा समय बाद सामने आई है। यूं तो अमेरिका की राजनीति में लंबे समय से कटु राजनीतिक निष्ठा व्याप्त रही है, लेकिन बंदूकों के व्यापक प्रसार ने ही सार्वजनिक विमर्शों में मतभेदों को दरअसल घातक धार प्रदान की है। विडंबना यह है कि ट्रम्प प्रशासन अमेरिकी संविधान के दूसरे संशोधन यानी हथियार रखने के अधिकार की रक्षा की कोशिशों में इस हद तक बढ़-चढ़कर आगे रहा है कि बंदूक रखने पर मुनासिब प्रतिबंधों को पलटने के मामले में उसका रवैया अक्सर नेशनल राइफल एसोसिएशन (एनआरए) के रूख के साथ मेल खाता है। मसलन, ट्रम्प ने 2000 में प्रहार करने वाले हथियारों पर प्रतिबंध का समर्थन किया था। फिर भी, उन्होंने 2016 के राष्ट्रपति चुनाव अभियान, जिसे एनआरए द्वारा खर्च किए गए लाखों डॉलर का समर्थन हासिल था, की शुरुआत करते वक्त अपना नजरिया बदल लिया। अमेरिका में गाहे-बगाहे सामूहिक गोलीबारी की घटनाएं होती रही हैं। इनमें इस साल हुई तीन घटनाएं और ऐसी घटनाओं पर नजर रखने वाले डेटाबेस के मुताबिक पिछले 60 सालों में 500 से ज्यादा घटनाएं शामिल हैं। कैपिटल हिल पर एनआरए और उसके जैसे संगठनों के पास मौजूद अपार धन एवं लॉबिंग की शक्ति के प्रभाव के बावजूद, अमेरिका के लिए यह मुनासिब होगा कि वह बंदूक हिंसा की इस लगातार बढ़ती महामारी के कगार से एक कदम पीछे हटे और बंदूक से जुड़े व्यावहारिक सुधारों को सामने रखे, जिन्हें बाद में कांग्रेस द्वारा कानून के रूप में पारित किया जा सके। जब तक समाज और लोकप्रिय संस्कृति बंदूक से जुड़े कानूनों पर ज्यादा उदार रुख नहीं अपनाती, तब तक यही मानना सही रहेगा कि देश भर में नियमित रूप से देखी जाने वाली हिंसा बेलगाम जारी रहेगी। Published – April 28, 2026 09:58 am IST Share this: Click to share on WhatsApp (Opens in new window) WhatsApp Click to share on Facebook (Opens in new window) Facebook Click to share on Threads (Opens in new window) Threads Click to share on X (Opens in new window) X Click to share on Telegram (Opens in new window) Telegram Click to share on LinkedIn (Opens in new window) LinkedIn Click to share on Pinterest (Opens in new window) Pinterest Click to email a link to a friend (Opens in new window) Email More Click to print (Opens in new window) Print Click to share on Reddit (Opens in new window) Reddit Click to share on Tumblr (Opens in new window) Tumblr Click to share on Pocket (Opens in new window) Pocket Click to share on Mastodon (Opens in new window) Mastodon Click to share on Nextdoor (Opens in new window) Nextdoor Click to share on Bluesky (Opens in new window) Bluesky Like this:Like Loading... Post navigation AAP MLA Mehraj Malik released from Kathua jail after J&K HC quashes his PSA detention Man stabs 2 security guards in Thane district; arrested, ATS takes over probe